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Chaudhary Charan Singh

"लोहिया के बाद चरण सिंह ही मेरे नेता" - मुलायम सिंह यादव

चौधरी साहब महान देशभक्त, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तथा कुशल प्रशासक थे और उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में देश को अविस्मरणीय सेवाएँ दी। इसके लिए सारा राष्ट्र उनका सदैव ऋणी रहेगा। हमारे जन-जीवन के प्रति चौधरी चरण सिंह का जो महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है, उसे चिरकाल तक याद रखा जायेगा। उन्होंने अपने देश और अपने लोगों के लिए जीवन पर्यन्त संघर्ष किया। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश मंे विकास सम्बन्धी प्रयासों को एक नई गति मिली। राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न पदों पर काम करते हुए और प्रधानमंत्री के रुप में उन्होंने देश के ऊपर एक अमिट छाप छोड़ी। चौधरी जी जनता की जरूरतों और आकांक्षाओं को भलीभाँति जानते और समझते थे। खेतिहर परिस्थितियों का गूढ़ ज्ञान रखने के कारण ही वे ग्रामीण क्षेत्र के लिए योजनायें एवं नीतियां तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभा सके। सामाजिक उद्देश्य के प्रति उनके समर्पण और सामाजिक न्याय में निष्ठा के कारण ही वे लोगों के सम्मान एवं स्नेह के पात्र बने। वे गरीबों, पिछड़े वर्गों और कमजोर लोगों के हितों के प्रबल पक्षधर तथा किसानों के परम हितैषी थे। उन्होंने भारतीय ग्रामीण जीवन के उत्थान एवं खुशहाली के लिए निरन्तर समर्पित होकर कार्य किया। अपने विराट व्यक्तित्व तथा कृतित्व से आधी शताब्दी तक उन्होंने भारत के राजनैतिक एवं सार्वजनिक जीवन को प्रभावित किया।

चौधरी साहब लगातार 40 साल तक, लखनऊ की सरजमीं पर रहे हैं। एक ही बंगले में रहते थे। कभी-कभी वह कहते थे कि मुलायम सिंह, उत्तर प्रदेश और लखनऊ से इतना मोह हो गया है कि हमें गृह मंत्री पद बेकार लग रहा है। अपने प्रदेश की जनता का कोई काम नहीं कर पा रहे हैं। इससे तो बेहतर था कि हम उ0प्र0 के मुख्यमंत्री हो जाते। उन्होंने कई बड़ी-बड़ी सभाओं में कहा कि, ‘‘हम दो बार मुख्यमंत्री बन चुके हैं, लेकिन मुलायम सिंह को मुख्यमंत्री नहीं बना पाए। हमने इनसे कहा है कि अपने नक्षत्र दिखाओ, स्टार दिखाओ।’’

हमारा सौभाग्य है कि उनके साथ हमने काम किया है और इतना किया है कि उनके बेहद नजदीक हो गए। इससे कई लोग नाराज भी रहते थे कि मुलायम सिंह को चौधरी साहब इतना स्नेह क्यांे देते हैं। उनके समय में राष्ट्रीय स्तर के कई बड़े-बड़े फैसले हमारे द्वारा तय किये हुए हैं।

आज हम खुलकर कहना चाहते हैं कि आज हम जहाँ तक पहुँचे हैं, उसमें चौधरी साहब की बहुत बड़ी भूमिका है। यह सही है कि हम डाॅ0 लोहिया से प्रभावित होकर ही सक्रिय राजनीति में आए थे समाजवादी युवजन सभा में काम करते थे। समाजवादी युवजन सभा से ही हम छात्रसंघ के प्रेसीडेंट बने। डाॅ0 लोहिया की मृत्यु के बाद राम सेवक यादव जी व नत्थू सिंह जी की अगुवाई में हम सब ने फैसला किया कि डाॅ0 लोहिया के निधन के बाद, चौधरी साहब के अलावा हमारा कोई नेता नहीं। यद्यपि कुछ दिनों के लिए, राजनारायण जी को लगातार मनाना पड़ा था, वह कहते थे कि चंद्रभानु गुप्ता का पैसा और भला समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता चुनाव जीत लेंगे। हम लोग कहते थे कि पैसे की आवश्यकता ही नहीं, हम लोग चौधरी साहब के साथ रह कर ही चुनाव जीत लेंगे। खैर, राजनारायण जी बहुत लोकतांत्रिक नेता थे, उन पर जब दबाव पड़ा तो उन्होंने स्वीकार कर लिया। राजनारायण जी तब ही फैसला लेते थे, जब उसे जायज मानते थे। उन्होंने चौधरी साहब को प्रधानमंत्री बनवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

चौधरी साहब इतने बड़े नेता कैसे बन गए?आज हम लोग उन्हें क्यों याद कर रहे हैं? क्योंकि उन्होंने इस देश के किसान, गरीब और मजदूर की बात उठाई। वह भेद-भाव, जात-पांत के बहुत खिलाफ थे। हम लोगों से कहते थे कि कहीं भी ऐसा आयोजन करो, जिससे जाति छोड़ कर शादी-विवाह हो।

‘‘चौधरी साहब के अनुयायियों की जिम्मेदारी अब बढ़ गयी है। उनके अनुयायी उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि तभी व्यक्त कर सकते हैं जब वे चौधरी साहब की नीतियों पर चल कर दिखायें। चौधरी चरण सिंह यह मानते थे कि किसानों, मजदूरों और दलित वर्ग के लोगों की गरीबी का कारण हैं नेहरूवादी नीतियाँं, जबकि गाँधी जी की नीतियाँ इस देश के लिए ज्यादा उपयुक्त हैं, गाँधी जी गाँव का दर्द समझते थे।

चौधरी साहब पंडित गोविन्द वल्लभ पंत तथा सरदार वल्लभ भाई पटेल के इसलिए आजीवन प्रशंसक रहे क्योंकि इन दोनों ने ही किसानों-मजदूरों की भलाई के बारे में सोचा। चौधरी साहब ने 60 फीसदी बजट गाँवों के लिए खर्च करने की जोरदार वकालत की थी। हम उनके सपनों को पूरा करने के लिए बजट का कम से कम आधा हिस्सा ग्रामीण विकास के लिए रखेंगे।

हम चौधरी साहब की नीतियों को इस तरह लागू करेेंगे कि कथनी और करनी में कोई भेद न रहे। बड़े परिवर्तन के लिए बड़ा संघर्ष करना होगा, बड़ी कुर्बानी देनी होगी और यही चौधरी साहब के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।’’